प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व -Natural Power important for health-subhindi.com

प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व –

प्रकृति जिसके हम ऋणी हैं जिसने हमको पनपाया, इस संसार में मानव का अस्तित्व स्थिर किया, जिसका हम सदैव ऋणी रहेंगे के विरुद्ध जाने पर हमें समस्या ,परेशानी होती है हम रोग ग्रसित हो जाते हैं वही दूसरी तरफ प्रकृति के अनुकूल वह मिलकर रहने पर हम 100 साल से ज्यादा की उम्र तक बिना रोगी हुए जीवित रह सकते हैं |


यहां हम छोटा सा प्रकाश प्रकृति के ऊपर डालेंगे की प्रकृति क्या है क्योंकि यह प्रश्न कई लोगों के मन में आता है और कुछ लोगों को इसे लेकर भ्रम है तो हम आपको बताए की प्रकृति हमारे आस पास या संसार का वह संसाधन है जिसे मानव ने नहीं बनाया पर मानव इन संसाधनों का प्रयोग कर अपना जीवन जीता है या यह कहे कि बिना इसके मानव जीवन संभव ही नहीं है जैसे प्रकाश,जल,वायु आदि |

अब हम बात करेंगे प्राकृतिक चिकित्सा की यह हमारे जीवन में किस तरह का महत्व रखता है –

दोस्तों हम बीमार कब होते हैं ,बीमार होने का कारण क्या होता है एक चीज जान लीजिए कि हमें प्रकृति ने बनाया है और जब हम प्रकृति के विरुद्ध जाते हैं जैसे अगर हमारे शरीर में पानी के कम सेवन से पानी की कमी हो जाती है तब हम बीमार हो जाते हैं , अगर हमें भरपूर वायु (ऑक्सिजन) ना मिले तो हम बीमार हो जाते हैं , अगर हमें प्रकाश कई दिनों तक ना मिले तो हमारी हड्डिया कमजोर हो जाएगी तब भी हम बीमार हो जाएंगे ऐसे बहुत से कारण है जब हम प्रकृति से दूर होने की कोशिश करते हैं, प्रकृति को इग्नोर करते हैं ,छोड़ते हैं तो हम बीमार पड़ जाते हैं वही दूसरी तरफ अगर आप प्रकृति से मिलकर रहते हैं जैसे सुबह की ताजी हवा में सैर करना,प्रकाश में कुछ समय बिताना , भरपूर पानी पीना आपको स्वस्थ बनाए रखता है और आप रोगों से दूर रहते हैं परंतु प्रकृति के साथ कदम से कदम मिलाकर के चलना बहुत ही ज्यादा कठिन है ऐसे में हम अपने जीवन में कुछ क्षण प्रकृति से दूर होते ही हैं तो हमें रोग हो ही जाते हैं और मानव ने इसके लिए  बहुत ही ऐसे दवाइयों का खोज कर लिया है जिसके सेवन से आपको कुछ ही क्षणों में आराम हो जाता है और  इसका असर दिखने लगता है पर क्या यह सही है- नहीं अगर आप दवाइयों का सेवन करते हैं तो आपको आराम तो हो जाएगा परंतु आप उस रोग के जड़ तक नही पहुच पाएंगे क्योकि दवा आपके दर्द को कम करने के लिए उस जगह के छेत्र को कुछ समय के लिए सुन्न कर देती है और जब दवा का असर ख़त्म होता है तो फिर से  रोग असर दिखाने लगता है | वाही दूसरी तरफ प्राकृतिक चिकित्सा में हम रोग को जड़ से उखाड़ सकते है क्योकि प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत रोगों का इलाज परहेज ,रहन सहन का तरीका,घरेलू औषधि , व्यायाम और प्रकृति के मिलाप से किया जाता है |

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किसी भी रोग में दवा या औषधि ज्यादा महत्व नही रखती सबसे ज्यादा कोई चीज महत्व रखता है तो वह है परहेज और रहन सहन अगर आप  को कोई रोग हो गया है तो आप उस रोग के कारण का पता लगा कर उसका परहेज शुरु करे देखेंगे की आप बिना औषधि के ही ठीक हो जायेंगे नही तो प्रकृति में ऐसे  तमाम औषधि है जिसके सेवन से आपका समस्या जड़ से ही दूर हो जायेगा | कुछ ऐसे भी लोग होते है जिनको गंभीर समस्या हो गयी होती है और तमाम अंग्रेजी द्वावो के इस्तेमाल से भी वह निरोगी नही हो पाते है तब जरुरत होती है प्राक्रतिक उपचार के भाग व्यायाम की | व्यायाम प्राक्रतिक उपचार का सबसे शक्तिशाली अंश है जिससे  बहुत बड़े से बड़े गंभीर समस्या को मात दिया जाता है क्योकि यह व्यक्ति को प्रकृति से मिला देता है | आप कहंगे की व्यायाम करने से व्यक्ति भला कैसे प्रकति से जुड़ता है तो हम आपको बताये की व्यायाम में कई ऐसे नियम है जैसे की व्यायाम को खुली जगह पर करना चाहिए जिससे की ऑक्सिजन हमारे शारीर में भरपूर मात्र में जाए ,व्यायाम के दौरान कुछ देर ध्यान लगाना चाहिए जिससे हमारे मन में शांति भावना जागृत हो ,व्यायाम सुबह करना चाहिए जिससे व्यक्ति सुबह सूरज उदय के साथ ही उठ जाये  और भी तमाम नियम जो आपको प्रकृति के नियम का मार्गदर्शन कराते है या आपको प्रकृति से सीधा मिला देते है |

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